अगर
आप अंग्रेजी और अन्य तरह की दवाइयों के इलाज के बावजूद पीलिया से छुटकारा न
पा सके हों तो आपके लिए यह एक अच्छी ख़बर है. पीलिया का आयुर्वेद में अचूक
इलाज है. मौसम बदलने के साथ ही पीलिया का प्रकोप बढ़ रहा है. आयुर्वेद
चिकित्सकों के अनुसार, यदि मकोय की पत्तियों को उबाल कर उसका सेवन किया जाए
तो पीलिया से जल्द राहत मिलती है. मकोय एक अचूक दवा है, इसका सेवन किसी भी
रूप में किया जाए, स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है. चिकित्सक कहते हैं
कि जब भी किसी को यह लगे कि उसका शरीर पीला हो रहा है और उसे पीलिया हो
सकता है तो वह पानी की मात्रा बढ़ा दे, क्योंकि पानी की मात्रा कम होने पर
शरीर से उत्सर्जित होने वाले तत्व रक्त में मिल जाते हैं. इससे व्यक्ति की
हालत बिगड़ने लगती है. यदि कच्चा पपीता सलाद के रूप में लिया जाए तो भी
पीलिया का असर कम होता है.
इसके अलावा परवल, लौकी और मूंग की दाल भी पीलिया के रोगी के लिए काफी लाभप्रद होती है. पीलिया से बचने लिए प्रोटीनयुक्त भोजन करें और वसायुक्त खाद्य पदार्थों से बचें, क्योंकि यह पीलिया के स्तर को बढ़ाते हैं. कई लोग मानते हैं कि पीलिया के रोगी को मीठा नहीं खाना चाहिए, जबकि आयुर्वेद चिकित्सकों का कहना है कि पीलिया का रोगी गाय के दूध से बना पनीर और छेने का रसगुल्ला आराम से खा सकता है. ये रोगी को नुक़सान नहीं, लाभ पहुंचाते हैं. जिन्हें क़ब्ज़ की शिकायत रहती हो, वे प्रतिदिन सोते समय अमलतास के गूदे का एक-दो चम्मच सेवन करें, क़ब्ज़ से राहत मिलती है. मौसमी फलों का सेवन अवश्य करना चाहिए, क्योंकि इससे बीमारियों की रोकथाम होती है.
- See more at: http://www.chauthiduniya.com/2011/09/jaundice-and-cherry-leaf.html#sthash.2qK1zqCH.dpuf
इसके अलावा परवल, लौकी और मूंग की दाल भी पीलिया के रोगी के लिए काफी लाभप्रद होती है. पीलिया से बचने लिए प्रोटीनयुक्त भोजन करें और वसायुक्त खाद्य पदार्थों से बचें, क्योंकि यह पीलिया के स्तर को बढ़ाते हैं. कई लोग मानते हैं कि पीलिया के रोगी को मीठा नहीं खाना चाहिए, जबकि आयुर्वेद चिकित्सकों का कहना है कि पीलिया का रोगी गाय के दूध से बना पनीर और छेने का रसगुल्ला आराम से खा सकता है. ये रोगी को नुक़सान नहीं, लाभ पहुंचाते हैं. जिन्हें क़ब्ज़ की शिकायत रहती हो, वे प्रतिदिन सोते समय अमलतास के गूदे का एक-दो चम्मच सेवन करें, क़ब्ज़ से राहत मिलती है. मौसमी फलों का सेवन अवश्य करना चाहिए, क्योंकि इससे बीमारियों की रोकथाम होती है.
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अगर
आप अंग्रेजी और अन्य तरह की दवाइयों के इलाज के बावजूद पीलिया से छुटकारा न
पा सके हों तो आपके लिए यह एक अच्छी ख़बर है. पीलिया का आयुर्वेद में अचूक
इलाज है. मौसम बदलने के साथ ही पीलिया का प्रकोप बढ़ रहा है. आयुर्वेद
चिकित्सकों के अनुसार, यदि मकोय की पत्तियों को उबाल कर उसका सेवन किया जाए
तो पीलिया से जल्द राहत मिलती है. मकोय एक अचूक दवा है, इसका सेवन किसी भी
रूप में किया जाए, स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है. चिकित्सक कहते हैं
कि जब भी किसी को यह लगे कि उसका शरीर पीला हो रहा है और उसे पीलिया हो
सकता है तो वह पानी की मात्रा बढ़ा दे, क्योंकि पानी की मात्रा कम होने पर
शरीर से उत्सर्जित होने वाले तत्व रक्त में मिल जाते हैं. इससे व्यक्ति की
हालत बिगड़ने लगती है. यदि कच्चा पपीता सलाद के रूप में लिया जाए तो भी
पीलिया का असर कम होता है.
इसके अलावा परवल, लौकी और मूंग की दाल भी पीलिया के रोगी के लिए काफी लाभप्रद होती है. पीलिया से बचने लिए प्रोटीनयुक्त भोजन करें और वसायुक्त खाद्य पदार्थों से बचें, क्योंकि यह पीलिया के स्तर को बढ़ाते हैं. कई लोग मानते हैं कि पीलिया के रोगी को मीठा नहीं खाना चाहिए, जबकि आयुर्वेद चिकित्सकों का कहना है कि पीलिया का रोगी गाय के दूध से बना पनीर और छेने का रसगुल्ला आराम से खा सकता है. ये रोगी को नुक़सान नहीं, लाभ पहुंचाते हैं. जिन्हें क़ब्ज़ की शिकायत रहती हो, वे प्रतिदिन सोते समय अमलतास के गूदे का एक-दो चम्मच सेवन करें, क़ब्ज़ से राहत मिलती है. मौसमी फलों का सेवन अवश्य करना चाहिए, क्योंकि इससे बीमारियों की रोकथाम होती है.
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इसके अलावा परवल, लौकी और मूंग की दाल भी पीलिया के रोगी के लिए काफी लाभप्रद होती है. पीलिया से बचने लिए प्रोटीनयुक्त भोजन करें और वसायुक्त खाद्य पदार्थों से बचें, क्योंकि यह पीलिया के स्तर को बढ़ाते हैं. कई लोग मानते हैं कि पीलिया के रोगी को मीठा नहीं खाना चाहिए, जबकि आयुर्वेद चिकित्सकों का कहना है कि पीलिया का रोगी गाय के दूध से बना पनीर और छेने का रसगुल्ला आराम से खा सकता है. ये रोगी को नुक़सान नहीं, लाभ पहुंचाते हैं. जिन्हें क़ब्ज़ की शिकायत रहती हो, वे प्रतिदिन सोते समय अमलतास के गूदे का एक-दो चम्मच सेवन करें, क़ब्ज़ से राहत मिलती है. मौसमी फलों का सेवन अवश्य करना चाहिए, क्योंकि इससे बीमारियों की रोकथाम होती है.
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अगर
आप अंग्रेजी और अन्य तरह की दवाइयों के इलाज के बावजूद पीलिया से छुटकारा न
पा सके हों तो आपके लिए यह एक अच्छी ख़बर है. पीलिया का आयुर्वेद में अचूक
इलाज है. मौसम बदलने के साथ ही पीलिया का प्रकोप बढ़ रहा है. आयुर्वेद
चिकित्सकों के अनुसार, यदि मकोय की पत्तियों को उबाल कर उसका सेवन किया जाए
तो पीलिया से जल्द राहत मिलती है. मकोय एक अचूक दवा है, इसका सेवन किसी भी
रूप में किया जाए, स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है. चिकित्सक कहते हैं
कि जब भी किसी को यह लगे कि उसका शरीर पीला हो रहा है और उसे पीलिया हो
सकता है तो वह पानी की मात्रा बढ़ा दे, क्योंकि पानी की मात्रा कम होने पर
शरीर से उत्सर्जित होने वाले तत्व रक्त में मिल जाते हैं. इससे व्यक्ति की
हालत बिगड़ने लगती है. यदि कच्चा पपीता सलाद के रूप में लिया जाए तो भी
पीलिया का असर कम होता है.
इसके अलावा परवल, लौकी और मूंग की दाल भी पीलिया के रोगी के लिए काफी लाभप्रद होती है. पीलिया से बचने लिए प्रोटीनयुक्त भोजन करें और वसायुक्त खाद्य पदार्थों से बचें, क्योंकि यह पीलिया के स्तर को बढ़ाते हैं. कई लोग मानते हैं कि पीलिया के रोगी को मीठा नहीं खाना चाहिए, जबकि आयुर्वेद चिकित्सकों का कहना है कि पीलिया का रोगी गाय के दूध से बना पनीर और छेने का रसगुल्ला आराम से खा सकता है. ये रोगी को नुक़सान नहीं, लाभ पहुंचाते हैं. जिन्हें क़ब्ज़ की शिकायत रहती हो, वे प्रतिदिन सोते समय अमलतास के गूदे का एक-दो चम्मच सेवन करें, क़ब्ज़ से राहत मिलती है. मौसमी फलों का सेवन अवश्य करना चाहिए, क्योंकि इससे बीमारियों की रोकथाम होती है.
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इसके अलावा परवल, लौकी और मूंग की दाल भी पीलिया के रोगी के लिए काफी लाभप्रद होती है. पीलिया से बचने लिए प्रोटीनयुक्त भोजन करें और वसायुक्त खाद्य पदार्थों से बचें, क्योंकि यह पीलिया के स्तर को बढ़ाते हैं. कई लोग मानते हैं कि पीलिया के रोगी को मीठा नहीं खाना चाहिए, जबकि आयुर्वेद चिकित्सकों का कहना है कि पीलिया का रोगी गाय के दूध से बना पनीर और छेने का रसगुल्ला आराम से खा सकता है. ये रोगी को नुक़सान नहीं, लाभ पहुंचाते हैं. जिन्हें क़ब्ज़ की शिकायत रहती हो, वे प्रतिदिन सोते समय अमलतास के गूदे का एक-दो चम्मच सेवन करें, क़ब्ज़ से राहत मिलती है. मौसमी फलों का सेवन अवश्य करना चाहिए, क्योंकि इससे बीमारियों की रोकथाम होती है.
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एक पौधा होता है भुई आंवला . ये इसी मौसम की पैदावार है -
इसकी पत्तियाँ पहचान लीजिये .इसकी लम्बाई मुश्किल से एक या डेढ़ फीट होती है . आपको पेट की कोई भी बीमारी हो या न हो ,अगर ये पौधा दिख जाए तो पूरा उखाड़ लीजिये और धोकर चबा जाइए।इसका वैज्ञानिक नाम है- Phyllanthus niruri इसमें फ़ाइलैन्थीन ,हाइपोफ़ाइलैन्थीन ,विटामिन-सी, क्वेरसैट्रीन ,लिनोलिक एसिड, लिनोलेनिक एसिड, सैक्लोफ्लेवान, रिसीनालिक एसिड, एस्त्रोगैलिन क़्वेरसैट्रीन ,लिगनान आदि रासायनिक तत्व पाए जाते हैं।
अब इसके अन्य सदुपयोग सुनिए---- मलेरिया----- अगर मलेरिया हो जाय तो पूरा पौधा उखाड़ कर उसका काढा बनाकर पी लीजिये। दिन में दो बार,दो- दो- पौधे का काढा . सुगर---- आपको डायबीटीज ज्यादा परेशान कर रही हो तो 20 ग्राम इस पौधे का चूर्ण और 20 दाने काली मिर्च का चूर्ण दिन में एक बार पानी से निगल लीजिये ,एक माह लगातार ,फिर देखिये फायदा। खुजली---- पूरे पौधे की चटनी पीस लीजिये उसमे सेंधा नमक मिलाइए और खुजली वाली जगह पर लेप कर लीजिये । प्रदर ---- किसी भी तरीके का प्रमेह या प्रदर हो तो या तो भूमि आमला के जड़ का काढा पीजिये या इसके बीजों का चूर्ण 2 चुटकी, चावल के पानी में मिला कर पीजिये। दस्त ---- किसी को दस्त की बहुत पुरानी बीमारी हो तो पूरे पौधे के काढ़े में आधा चम्मच मेथी का चूर्ण मिलाकर पी लीजिये। खांसी--- इस पौधे का काढा पुरानी खांसी और सांस की बीमारियों में भी बहुत तेज फायदा पहुंचाता है।दिन में दो बार पीना चाहिये।
हम फिर से लीवर पर आते हैं - लीवर के मरीजों को मकोय के पत्तो का रस 2 चम्मच और नीम के पत्तों का रस दो चम्मच सुबह, दोपहर शाम लेना चाहिए ,क्रांतिकारी परिवर्तन दिखाई देगा। ** इन्हें 250 ग्राम गुड एक दिन में खा लेना चाहिये, भले खाना खाने के लिए पेट में जगह न बचे। ** और पानी तो खैर हर आधे घंटे पर 150 ग्राम पी ही लेना चाहिए, भले ही प्यास न लगे। चित्र गूगल से साभार मेरा समस्त
अगर आप अंग्रेजी और अन्य तरह की दवाइयों के इलाज के बावजूद पीलिया से छुटकारा न पा सके हों तो आपके लिए यह एक अच्छी ख़बर है. पीलिया का आयुर्वेद में अचूक इलाज है. मौसम बदलने के साथ ही पीलिया का प्रकोप बढ़ रहा है. आयुर्वेद चिकित्सकों के अनुसार, यदि मकोय की पत्तियों को उबाल कर उसका सेवन किया जाए तो पीलिया से जल्द राहत मिलती है. मकोय एक अचूक दवा है, इसका सेवन किसी भी रूप में किया जाए, स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है. चिकित्सक कहते हैं कि जब भी किसी को यह लगे कि उसका शरीर पीला हो रहा है और उसे पीलिया हो सकता है तो वह पानी की मात्रा बढ़ा दे, क्योंकि पानी की मात्रा कम होने पर शरीर से उत्सर्जित होने वाले तत्व रक्त में मिल जाते हैं. इससे व्यक्ति की हालत बिगड़ने लगती है. यदि कच्चा पपीता सलाद के रूप में लिया जाए तो भी पीलिया का असर कम होता है.
इसके अलावा परवल, लौकी और मूंग की दाल भी पीलिया के रोगी के लिए काफी लाभप्रद होती है. पीलिया से बचने लिए प्रोटीनयुक्त भोजन करें और वसायुक्त खाद्य पदार्थों से बचें, क्योंकि यह पीलिया के स्तर को बढ़ाते हैं. कई लोग मानते हैं कि पीलिया के रोगी को मीठा नहीं खाना चाहिए, जबकि आयुर्वेद चिकित्सकों का कहना है कि पीलिया का रोगी गाय के दूध से बना पनीर और छेने का रसगुल्ला आराम से खा सकता है. ये रोगी को नुक़सान नहीं, लाभ पहुंचाते हैं. जिन्हें क़ब्ज़ की शिकायत रहती हो, वे प्रतिदिन सोते समय अमलतास के गूदे का एक-दो चम्मच सेवन करें, क़ब्ज़ से राहत मिलती है. मौसमी फलों का सेवन अवश्य करना चाहिए, क्योंकि इससे बीमारियों की रोकथाम होती है.
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अगर
आप अंग्रेजी और अन्य तरह की दवाइयों के इलाज के बावजूद पीलिया से छुटकारा न
पा सके हों तो आपके लिए यह एक अच्छी ख़बर है. पीलिया का आयुर्वेद में अचूक
इलाज है. मौसम बदलने के साथ ही पीलिया का प्रकोप बढ़ रहा है. आयुर्वेद
चिकित्सकों के अनुसार, यदि मकोय की पत्तियों को उबाल कर उसका सेवन किया जाए
तो पीलिया से जल्द राहत मिलती है. मकोय एक अचूक दवा है, इसका सेवन किसी भी
रूप में किया जाए, स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है. चिकित्सक कहते हैं
कि जब भी किसी को यह लगे कि उसका शरीर पीला हो रहा है और उसे पीलिया हो
सकता है तो वह पानी की मात्रा बढ़ा दे, क्योंकि पानी की मात्रा कम होने पर
शरीर से उत्सर्जित होने वाले तत्व रक्त में मिल जाते हैं. इससे व्यक्ति की
हालत बिगड़ने लगती है. यदि कच्चा पपीता सलाद के रूप में लिया जाए तो भी
पीलिया का असर कम होता है.
इसके अलावा परवल, लौकी और मूंग की दाल भी पीलिया के रोगी के लिए काफी लाभप्रद होती है. पीलिया से बचने लिए प्रोटीनयुक्त भोजन करें और वसायुक्त खाद्य पदार्थों से बचें, क्योंकि यह पीलिया के स्तर को बढ़ाते हैं. कई लोग मानते हैं कि पीलिया के रोगी को मीठा नहीं खाना चाहिए, जबकि आयुर्वेद चिकित्सकों का कहना है कि पीलिया का रोगी गाय के दूध से बना पनीर और छेने का रसगुल्ला आराम से खा सकता है. ये रोगी को नुक़सान नहीं, लाभ पहुंचाते हैं. जिन्हें क़ब्ज़ की शिकायत रहती हो, वे प्रतिदिन सोते समय अमलतास के गूदे का एक-दो चम्मच सेवन करें, क़ब्ज़ से राहत मिलती है. मौसमी फलों का सेवन अवश्य करना चाहिए, क्योंकि इससे बीमारियों की रोकथाम होती है.
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इसके अलावा परवल, लौकी और मूंग की दाल भी पीलिया के रोगी के लिए काफी लाभप्रद होती है. पीलिया से बचने लिए प्रोटीनयुक्त भोजन करें और वसायुक्त खाद्य पदार्थों से बचें, क्योंकि यह पीलिया के स्तर को बढ़ाते हैं. कई लोग मानते हैं कि पीलिया के रोगी को मीठा नहीं खाना चाहिए, जबकि आयुर्वेद चिकित्सकों का कहना है कि पीलिया का रोगी गाय के दूध से बना पनीर और छेने का रसगुल्ला आराम से खा सकता है. ये रोगी को नुक़सान नहीं, लाभ पहुंचाते हैं. जिन्हें क़ब्ज़ की शिकायत रहती हो, वे प्रतिदिन सोते समय अमलतास के गूदे का एक-दो चम्मच सेवन करें, क़ब्ज़ से राहत मिलती है. मौसमी फलों का सेवन अवश्य करना चाहिए, क्योंकि इससे बीमारियों की रोकथाम होती है.
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अगर
आप अंग्रेजी और अन्य तरह की दवाइयों के इलाज के बावजूद पीलिया से छुटकारा न
पा सके हों तो आपके लिए यह एक अच्छी ख़बर है. पीलिया का आयुर्वेद में अचूक
इलाज है. मौसम बदलने के साथ ही पीलिया का प्रकोप बढ़ रहा है. आयुर्वेद
चिकित्सकों के अनुसार, यदि मकोय की पत्तियों को उबाल कर उसका सेवन किया जाए
तो पीलिया से जल्द राहत मिलती है. मकोय एक अचूक दवा है, इसका सेवन किसी भी
रूप में किया जाए, स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है. चिकित्सक कहते हैं
कि जब भी किसी को यह लगे कि उसका शरीर पीला हो रहा है और उसे पीलिया हो
सकता है तो वह पानी की मात्रा बढ़ा दे, क्योंकि पानी की मात्रा कम होने पर
शरीर से उत्सर्जित होने वाले तत्व रक्त में मिल जाते हैं. इससे व्यक्ति की
हालत बिगड़ने लगती है. यदि कच्चा पपीता सलाद के रूप में लिया जाए तो भी
पीलिया का असर कम होता है.
इसके अलावा परवल, लौकी और मूंग की दाल भी पीलिया के रोगी के लिए काफी लाभप्रद होती है. पीलिया से बचने लिए प्रोटीनयुक्त भोजन करें और वसायुक्त खाद्य पदार्थों से बचें, क्योंकि यह पीलिया के स्तर को बढ़ाते हैं. कई लोग मानते हैं कि पीलिया के रोगी को मीठा नहीं खाना चाहिए, जबकि आयुर्वेद चिकित्सकों का कहना है कि पीलिया का रोगी गाय के दूध से बना पनीर और छेने का रसगुल्ला आराम से खा सकता है. ये रोगी को नुक़सान नहीं, लाभ पहुंचाते हैं. जिन्हें क़ब्ज़ की शिकायत रहती हो, वे प्रतिदिन सोते समय अमलतास के गूदे का एक-दो चम्मच सेवन करें, क़ब्ज़ से राहत मिलती है. मौसमी फलों का सेवन अवश्य करना चाहिए, क्योंकि इससे बीमारियों की रोकथाम होती है.
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इसके अलावा परवल, लौकी और मूंग की दाल भी पीलिया के रोगी के लिए काफी लाभप्रद होती है. पीलिया से बचने लिए प्रोटीनयुक्त भोजन करें और वसायुक्त खाद्य पदार्थों से बचें, क्योंकि यह पीलिया के स्तर को बढ़ाते हैं. कई लोग मानते हैं कि पीलिया के रोगी को मीठा नहीं खाना चाहिए, जबकि आयुर्वेद चिकित्सकों का कहना है कि पीलिया का रोगी गाय के दूध से बना पनीर और छेने का रसगुल्ला आराम से खा सकता है. ये रोगी को नुक़सान नहीं, लाभ पहुंचाते हैं. जिन्हें क़ब्ज़ की शिकायत रहती हो, वे प्रतिदिन सोते समय अमलतास के गूदे का एक-दो चम्मच सेवन करें, क़ब्ज़ से राहत मिलती है. मौसमी फलों का सेवन अवश्य करना चाहिए, क्योंकि इससे बीमारियों की रोकथाम होती है.
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Thanks for sharing remedies for jaundice. Herbal supplement is both safe and effective. It is fortified with with natural ingredients.Visit also http://www.hashmidawakhana.org/natural-remedies-for-jaundice-treatment.html
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